क्या-होती-है-शत्रु-संपत्ति-जिसे-मोदी-सरकार-बेचने-की-तैयारी-कर-रही-है

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इन सात प्वाइंट के जरिये समझें क्या है शत्रु संपत्ति बिल

इन सात प्वाइंट के जरिये समझें क्या है शत्रु संपत्ति बिल

1947 में देश के बंटवारे, 1962 में चीन, 1965 और 1971 पाकिस्तान के खिलाफ हुई जंगों के दौरान या उसके बाद भारत छोड़कर पाकिस्तान या चीन चले गए नागरिकों को भारत सरकार शत्रु मानती है और उनकी संपत्तियों का शत्रु संपत्ति. पाकिस्तान, चीन के अलावा दूसरे देशों की नागरिकता ले चुके लोगों और कंपनियों की संपत्ति भी शत्रु संपत्ति में शामिल है. ऐसी संपत्तियों की देखरेख के लिए सरकार एक कस्टोडियन की नियुक्ति करती है. भारत सरकार ने 1968 में शत्रु संपत्ति अधिनियम लागू किया था, जिसके तहत शत्रु संपत्ति को कस्टोडियन में रखने की सुविधा प्रदान की गई. केंद्र सरकार ने इसके लिए कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी विभाग का गठन किया है, जिसे शत्रु संपत्तियों को अधिग्रहित करने का अधिकार है.

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यूपी में सबसे ज्यादा संपत्ति

गौरतलब है कि देश में 9280 पाकिस्तानी नागरिकों की और 126 चीनी नागरिकों की शत्रु संपत्ति है. 2018 में तत्कालीन मंत्री हंसराज अहीर ने राज्यसभा में कहा था कि देश में मौजूद शत्रु संपत्ति की कुल कीमत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है. इसमें 4000 से अधिक संपत्ति उत्तर प्रदेश में, करीब 2700 पश्चिम बंगाल में और 487 से अधिक नई दिल्ली में है.चीन में हेल्थ इमरजेंसी घोषित

कुछ समय पहले मोदी सरकार के द्वारा शत्रु संपत्ति अधिनियम में बदलाव किया गया है. जिसके तहत देश के बंटवारे के दौरान देश छोड़कर दूसरे देशों यानी पाकिस्तान और चीन में बसे लोगों के उत्तराधिकारियों का अब इस संपत्ति पर कोई दावा नहीं रह गया है.


क्या है शत्रु संपत्ति संशोधन कानून 

युद्धों के बाद पाकिस्तान और चीन पलायन कर गए लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्ति पर उत्तराधिकार के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए हैं.

• विधेयक के मुताबिक, अब किसी भी शत्रु संपत्ति के मामले में केंद्र सरकार या कस्टोडियन द्वारा की गई किसी कार्रवाई के संबंध में किसी वाद या कार्यवाही पर विचार नहीं किया जाएगा.हो जाइए सावधान, ये हैं साइबर फ्रॉड के नए तरीके

• शत्रु संपत्ति के मालिक का कोई उत्तराधिकारी भी यदि भारत लौटता है तो उसका इस संपत्ति पर कोई दावा नहीं होगा. एक बार कस्टोडियन के अधिकार में जाने के बाद शत्रु संपत्ति पर उत्तराधिकारी का कोई अधिकार नहीं होगा.आपके ‘Thank You’ से हो रहा धरती का विनाश! विश्वास न हो तो ये आंकड़े देखिए

• शत्रु के वारिस के भारतीय होने या शत्रु अपनी नागरिकता बदलकर किसी और देश का नागरिक बन जाए, ऐसी स्थितियों भी शत्रु संपत्ति कस्टोडियन के पास ही रहेगी.• नए कानून के मुताबिक, शत्रु संपत्ति अब उस हालात में संपत्ति के मालिक को वापस दी जाएगी, जबकि वो सरकार के पास आवेदन भेजेगा और संपत्ति शत्रु संपत्ति नहीं पाई जाएगी.क्या मानव को चाँद पर जाने से कोई लाभ हुआ है या फिर यह केवल एक पब्लिसिटी स्टंट था?


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• नए कानून के मुताबिक, कस्टोडियन को शत्रु संपत्ति को बेचने का अधिकार भी होगा, जबकि पिछले कानून के मुताबिक, अगर संपत्ति के संरक्षण या रखरखाव के लिए जरूरी हो तभी संपत्ति को बेचा जा सकता था.

• पिछले कानून के मुताबिक, शत्रु संपत्ति से होने वाली आय का इस्तेमाल शत्रु के वारिस, अगर वो भारत के नागरिक हों तो कर सकते थे. जबकि नए कानून में ये प्रावधान खत्म कर दिया गया है.

किस राज्य में कितनी शत्रु संपत्तियां 

बता दें कि विभाजन के दौरान उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से सबसे अधिक लोगों ने पलायन किया है। पाकिस्तान गए लोगों से संबंधित 9,281 शत्रु संपत्तियों में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 4,991 संपत्तियां हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में 2,735 और दिल्ली में 487 संपत्तियां हैं।  चीन गए लोगों से जुड़े 126 शत्रु संपत्तियों में मेघालय में 57 और पश्चिम बंगाल में 29 संपत्तियां हैं। अपने चेहरे को कम उम्र का कैसे बनाये रखें? How to keep your face young?

आंध्र प्रदेश: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 159  जिसकी कुल कीमत-11,641 करोड़ है। 
असम: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 6 ,चीनी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 64 कीमत 41.26 करोड़ है।   
बिहार: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 79, कीमत 101 करोड़,
छत्तीसगढ़: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 78 है और इसकी कीमत  54.6 करोड़ है। 
दिल्ली: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 487 ,चीनी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 02 इसकी कीमत 816 करोड़ रुपये है।   
गोवा: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 263 इसकी कीमत 100 करोड़ रुपये है।   
गुजरात: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 146 कीमत 844 करोड़ आंकी गई है।     
हरियाणा: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 09 इसकी कीमत 791 करोड़ है   
कर्नाटक: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 20 ,जबकि चीनी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 01 कीमत 151 करोड़ है।  
केरल: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 60, कीमत 1375 करोड़ है। 
मध्यप्रदेश: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 88, चीनी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 01 कीमत- 1796 रुपये है  
महाराष्ट्र: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 48, कीमत- 571 करोड़ है    
राजस्थान: पाकिस्तानी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 22 ,चीनी नागरिकों की प्रॉपर्टी: 01 कीमत 23 करोड़ है। 

वंशज प्रॉपर्टी पर नहीं कर सकते हैं दावा
शत्रु संपत्ति पर नियंत्रण रखने और देख-रेख के लिए गृह मंत्रालय ने आदेश भी दिया है। मंत्रालय के आदेश के बाद जिन जिलों और राज्यों में शत्रु प्रॉपर्टी हैं  उनके मूल्यांकन समितियां भी गठित की गई हैं जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारियों के हाथ में है। यह फैसला शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं वैधीकरण) अधिनियम 2017 और शत्रु संपत्ति (संशोधन) नियम 2018 में संशोधन के बाद उठाया गया है। पिछले साल लोकसभा में उक्त विधेयक में संशोधन के बाद यह प्रावधान किया गया है कि भारत विभाजन के समय पाकिस्तान या चीन चले गए लोगों के वंशज भारत में अपने पुरखों की संपत्तियों पर कोई दावा या फिर दलील नहीं कर सकते हैं। डिजिटल मार्केटिंग क्या है? जाने और सीखे

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